वास्तव में भारतीय लोकतंत्र में मतदाता कठपुतली ही है , जो केवल धागों को नचाने वाले के हाथों में नाचते रहता — हेमंत चंद्र दुबे कैंसर फाइटर वरिष्ठ समाज सेवक उपप्रधान सपादकं राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 निर्वाचन आयोग मतदाता को कठपुतली का खेल दिखाकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का संदेश और निवेदन कर रहा है।वास्तव में भारतीय लोकतंत्र में मतदाता को कठपुतली का खेल दिखाना सामयिक,प्रासंगिक और सार्थक है क्योंकि भारतीय लोकतंत्र में मतदाता कठपुतली से अधिक और कुछ नहीं है , जो राजनैतिक दलों के हाथों की कठपुतली मात्र है, इस शासन व्यवस्था में मतदाता की औकात कठपुतली से अधिक और कुछ नहीं है। राजनैतिक दल इस कठपुतली रूपी मतदाता को अपनी उंगलियों की इशारो पर मुफ्त की योजनाओं से नचाते रहते हैं किसी राज्य में लाडली बहना योजना, किसी राज्य में लाड़ला भाऊ योजना , तो किसी राज्य में 10 ग्राम सोना विवाह में देकर, तो कही धन लक्ष्मी योजना के धागों में बांधकर उंगलियों पर जैसा चाहते है वैसा नचाते है और मतदाता रूपी कठपुतली उँगलियों की इशारों पर नाचती है। भारत का लोकतन्त्र मात्र कठपुतली का खेल है, जिसमें राजनैतिक दल अपने हिसाब से कठपुतली का खेल तैयार करते हैं और फिर अलग अलग मंचों पर उसका मंचन कर मतदाता रूपी कठपुतली को खेल खिलाते है। जो ज़्यादा देर तक प्रलोभन के साथ कठपुतली को सफाई से नचा लेता है वही सत्ता पर काबिज हो जाता हैं और फिर कठपुतली के धागे अपनी उंगलियों से छोड़ देता है। इसके बाद वह कठपुतली रूपी मतदाता अपनी पास बुके लेकर बैंकों के चारों ओर चक्कर लगाने लगता हैं , आधार कार्ड अपडेट कराने लगता है, और कठपुतली का खेल दिखाने वाला आज के दिन ही 25 जून 1975 को कठपुलती रूपी मतदाता के सभी मौलिक अधिकार छीनकर आपातकाल लगाकर अवाम को जेलों में ठूंस देता है, वही कठपुतली का खेल दिखाने वाला रामभक्तो का सीना गोली यों से छन्नी कर दूसरे कठपुतली का खेल दिखाने वाले से पद्म विभूषण सम्मान पा लेता है, और वही पद्म भूषण सम्मान देने वाले राम भक्त अयोध्या की तिजौरी में हाथ साफ करने लगते है। कठपुतली का खिलाने वाला भूखंड के साथ परियोजनाओं का खेल खेलने लग जाता हैं, कोयले में हाथ काले करने लग जाता है , अपने बाप दादाओं के स्थापित नेशनल हेरल्ड अखबार के शेयर बेचकर रातोंरात करोड़ों रूपये कमाने में लग जाता है, शराब की एक बोतल पर दो बोतल फ्री की शराब नीति बनाकर आम आदमी को कठपुतली का खेल खिलाकर पिलाने लग जाता हैं,र वह कठपुतली का खेल दिखाने वाला भव्य राम मंदिर का निर्माण कर बोरो में रूपए भरकर अयोध्या से ट्रेन में लेकर दक्षिण जाने लगता है और खाली हाथ दक्षिण से हवाई जहाज में बैठकर अयोध्या वापस लौटने लगता है। बाबूजी ये भारत का लोकतंत्र है जो कठपुतली का खेल खिलाता और दिखाता है वही सब कुछ है, वही हमारा माई बाप है ,समय है बाबूजी मतदाता सूची में नाम जुड़वा लिजिए नहीं तो इस कठपुतली के खेल से बाहर हो जाओगे, स्थानीय चुनाव नजदीक आ गए है ये राजनीति के कठपुतली का खेल दिखाने वाले धागे बुनने लगे हैं बस कठपुतली का खेल शुरू होने वाला है, जिसकी झलक चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए कठपुतली का खेल दिखाना शुरू कर दिया है। उपप्रधान सपादकं राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 Please follow and like us: Post Views: 44 Post navigation महाकाल की भूमि पर लूट बंद करो जमीन घोटाला करने वाली सरकार होश में मोहन यादव इस्तीफा दो के नारों के साथ राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देने पहुंचा युवा कांग्रेस लोगों की रुचि रचनात्मक कार्यों में कम और विध्वंसक कार्यों में ज्यादा है