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संजय वर्मा

आष्टा।शहीद भगतसिंह शासकीय स्नातक महाविद्यालय आष्टा में स्वामी विवेकानन्द रोजगार मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा 9 अगस्त शुक्रवार को अगस्त क्रान्ति दिवस मनाया गया।

इस अवसर पर मुख्यवक्ता राजनीति विज्ञान विषय प्रभारी डाॅ.बेला सुराणा द्वारा अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे इस आजादी के लिये लाखों लोगो ने अपनी जान की बाजी लगादी। विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़े तो लोगो ने अपनी नौकरिया छोड़ दी। 8 अगस्त को महात्मा गाँधी जी ने संपूर्ण भारत में एक ‘‘असहयोग आंदोलन’’ करने का निश्चय किया।

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इस आंदोलन का महत्व नारा था ‘करो या मरो’ इस आंदोलन में बच्चे, युवा, वृद्ध एवं महिलाओं सभी का सहयोग मिला। छोटे-छोटे रुप में समस्त भारत में चल रहे आंदोलन गांधीजी एक आवाज पर एकीकृत हो गये। इसके महत्वपूर्ण चरण थे हड़ताल, बहिष्कार, धरना प्रदर्शन। गांधीजी 9 अगस्त को अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार हो गये। ओल्ड गोल्ड लेडी के रुप में अरुणा आसफ अली ने ग्वालिया टैंक में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जिसे आजाद मैदान के नाम से जाना गया। इस आंदोलन का समग्र भारत पर प्रभाव पड़ा।

आंदोलन ब्रिटिश शासन के ताबूत में अंतिम कील सिद्ध हुआ। समस्त भारत की एक ही आवाज थी।दिलों में तूफानो की टोली, लबों पर इंकलाब है।रोको न हमे आज, हम हिलादेंगे ब्रिटिश राज।।

इस कार्यक्रम में विद्यालय की छात्रा रिशिता बी.काॅम प्रथम वर्ष ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम में डाॅ.रचना श्रीवास्तव, डाॅ.ललिता राय श्रीवास्तव, डाॅ.मेघा जैन, कु.शिवानी मालवीय, श्री जयपाल विश्वकर्मा, श्री वैभव सुराणा, श्री जगदीश नागले सहित महाविद्यालय के छात्र/छात्राएँ उपस्थित रहें।

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