Amla करुणा बौद्ध बिहार में पर्यावरण पर्व पर आत्मचिंतन आचरण में सुधार पर जोर, वर्षावास का समापन संदेश मिला तीन माह का अभ्यास नहीं जीवनभर धम्मो पर चलना जरूरी , सुजाता महिला मंडल ने बोद्धचार्य वी के झारबडे को सम्मानित किया उपप्रधान समपादक राकेश डबबू तायवाडे बैतूल आमला 🙏 आमला करुणा बौद्ध विहार भीम नगर आमला में बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया तहसील शाखा आमला की तत्वाधान में रविवार को वार्षिक समापन एवं पर्यावरण पर्व श्रद्धा और धम्ममय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम सुबह रविवार को 11:00 बजे भंते जी बोद्धचार्य वी के झारबडे ने बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर माला अर्पण और दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम प्रारंभ किया। आत्म चिंतन अपनी गलतियों को स्वीकार करने में और उसमें सुधार लाने का संदेश दिया । वक्ताओं ने वर्षवास भले ही तीन माह का होता है लेकिन धम्म के अनुसार जीवन जीने का अभ्यास निरंतर जारी रहना चाहिए। धम्म अध्ययन और आत्म चिंतन के माध्यम से साधना करता है । पर्यावरण पर भिक्षु एक दूसरे को अपने आचरण की त्रुटियां बताने के लिए आमंत्रित करते हैं । ताकि गलतियों को पहचान कर उसमें सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि पर्यावरण केवल धार्मिक परंपराओं नहीं बल्कि आत्म सुधार और पारंपरिक सवाद का अवसर भी है। धम्म विनय का मर्यादा में रहकर संवाद करने में आपसी संबंध और अनुशासन मजबूत होता है बाबासाहेब अंबेडकर के रचित ग्रंथ भगवान बुद्ध और उनका धर्म का वचन हुआ। शाम 3:00 बजे समापन हुआ। भंते जी ने श्रद्धालुओं को त्रिशरण पंचशील दिलाकर धम्मोपदेश दिया । सुजाता महिला मंडल द्वारा बोद्धचार्य वी के झरबडे जी की सराहना करते हुए। समाज के प्रति लगाओ उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सफेद वस्त्र एवं पुष्प देकर सम्मानित किया गया कार्यक्रम में उपासक उपाशिकाएं सफेद वस्त्रों में बौद्ध विहार पहुंचे। 🙏कठिंन चीवरदान त्याग और कर्तव्यता का प्रतीक 🙏वात्सल्य अतुलकर ने कठिन चीवरदान को त्याग ,उदारता और भिक्षु संघ के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि वर्षवास का समापन अपने जीवन और व्यवहार की समीक्षा कर धम्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का अवसर है। कार्यक्रम के समापन के बाद सुजाता महिला मंडल की प्रमुख शांत मालवे, निर्मला पंडोले ,निर्मला सूर्यवंशी ,ज्योति नागले, माया खडसे, चंद्रकला गायकवाड, शीला सूर्यवंशी, कविता नागले, कांता हुडमाडे, सहित भारतीय बौद्ध महासंघ के अंतर्गत कार्यक्रम मे बड़ी संख्या में उपासक उपासिकाए उपस्थिति रहे। सुजाता महिला मंडल के द्वारा अन्य कार्यक्रम भी किए गए। अध्यक्ष वत्सला अतुलकर , बौद्धचार्य वी के झारबडे ,भंते जी, ने आभार व्यक्त करते हुए। वर्षावास और पर्यावरण पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला वर्षा वास के दौरान भिक्षु सॉघ ध्यान, धम्म अध्ययन और आत्म चिंतन के माध्यम से साधना करता है। कार्यक्रम के समापन के बाद भोज का आयोजन किया गया था। उपप्रधान समपादक राकेश डबबू तायवाडे बैतूल आमला 🙏 Please follow and like us: Post Views: 101 Post navigation 75 कदम की आज की धरती सेवा_सागौन वन हाथी नाले के किनारे ताकि मां माचना नदी के प्राण बचाएं जा सके _96 किलो पॉलीथिन प्लास्टिक डिस्पोजल संग्रहित किया गया —*——–*——-***________ 75 कदम का 25 वाँ दिन – पॉलीथिन मुक्त ,कैंसर मुक्त मिशन 0000000000000 माता शारदा देवी साक्षात मैहर से आकर प्रगट हुइ, ऐसा प्रतीत होता, महाआरती में उमड़ा जनसैलाब, 30 अक्टूबर को विशाल भंडारा, 31 अक्टूबर को विसर्जन