‘‘ *सफल रैली की कमियां/खामियां’’।* ‘‘आगाज है कि अंजाम?’’ राजीव खंडेलवाल (लेखक, कर सलाहकार एवं पूर्व अध्यक्ष, बैतूल सुधार न्यास) 02 नवम्बर 2026 उपप्रधान समपादक राकेश डबबू तायवाडे बैतूल आमला🙏 *भूमिका* 1 नवंबर की बहुचर्चित ‘‘वोट बचाओ, देश बचाओ ’’मार्च रैली उदार दृष्टिकोण से यदि महारैली अथवा ‘‘रैला’’ में परिवर्तित न भी हो पाई, तब भी उसे ‘‘सफलतम नहीं तो सफल’’ रैली, निसंदेह जरूर कहा जा सकता है। देश का दुर्भाग्य है कि वर्तमान में सार्वजनिक जीवन में किसी भी घटना का आकलन किसी भी पक्ष द्वारा निष्पक्षता तथा संतुलित दृष्टिकोण अपनाकर नहीं किया जाता है, जो वर्तमान रैली पर भी लागू है। इसीलिए आयोजकगण जहां इस रैली को ऐतिहासिक सफलतम बतला रहे हैं, वही विरोधी अर्थात सत्तारूढ़ भाजपा इसको ‘‘असफल दिखाने का असफल प्रयास कर’’ रही है, जिसके लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस तक भाजपा प्रवक्ताओं ने की। देश में सत्तारूढ़़ दल के खिलाफ कितनी रैलियां हुई हैं, लेकिन क्या कभी सत्तारूढ़ दल ने वर्तमान सामान पत्रकार वार्ता आयोजित कर सत्य की दृष्टि से उसे असफल बताने का प्रयास किया क्या? इससे ही रैली की सफलता व महत्ता को समझा जा सकता है। *एक आकलन।* उक्त रैली में ‘‘विविधता में एकता’’ जरूर देखने को मिली। भले ही वह कश्मीर से कन्याकुमारी एक न रही। लगभग 1 किलोमीटर लम्बे बैनर पर 50 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम जो एसआईआर की कार्रवाई में हटाये गये थे, प्रिंट करके रैली के उद्देष्य के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत कर सार्थक बनाने का प्रयास किया गया। कोई भी आयोजकगण अपनी रैली की सफलता के साथ कमियों को नहीं गिनाता है और न ही गिनाता है। शायद ‘‘सफलता’’ उसे कमियों की ओर जाने का रास्ता भी नहीं देती हंै। बावजूद इसके यदि सफल से सफलतम स्थिति की ओर आपको जाना है और 2029 के लक्ष्य की पूर्ति करना है, तो निश्चित रूप से आपको अपने हर कार्य के परिणाम पर अंदरखाने से भी झांकना होगा। तभी आप यह तय कर पाएंगे कि आगे इससे अच्छा और क्या कर सकते हैं, जो इस बार नहीं कर पाए। लेकिन इस समय वर्तमान आयोजक गुणों से इस सोच की उम्मीद करना ‘‘मुंगेरीलाल का सपना’’ देखने जैसा ही होगा। *कमियां।* 21 पार्टियों मतलब पूरा इंडिया गठबंधन के साथ सिविल सोसाइटी और गठबंधन के बाहर की कुछ और संगठन के शामिल होने के बावजूद कुछ प्रमुख पार्टियां इसमें शामिल नहीं हो पाई, जो ‘‘कांग्रेस विरुद्ध सब (आॅल)’’ जैसा 1974 में जेपी के संपूर्ण क्रांति आंदोलन के समय बना था, वैसा इस समय ‘‘भाजपा विरुद्ध ऑल’’ नहीं बन पाया। जो प्रमुख पार्टी एनडीए का हिस्सा नहीं है, और इस रैली में शामिल नहीं हुई। वे निम्नानुसार है ‘‘आप’’, ‘‘बीजेडी’’, ‘‘डीएमके’’, ‘‘जन-स्वराज पार्टी’’ (पीके) (वाईएस जगन मोहन रेड्डी), ‘‘एआईएएमएस’’ (असदुद्दीन), तमिलनाडु विजय पार्टी (विजय) भारत राष्ट्र समिति (केसीआर), कॉकरोच जनता पार्टी। *राहुल गांधी जवाब दे?* दिल्ली में आयोजित रैली में आयोजकों को एक और प्रश्न का उत्तर देना आवश्यक है। इस रैली में कार्यकर्ताओं के अलावा आम नागरिकों की भागीदारी हुई है तो उनका अनुपात क्या था? यदि राहुल गांधी यह दावा करते है कि आम नागरिक ज्यादा आयी, तो उसका एक अर्थ यह निकलता है कि पार्टी संगठन आज भी कमजोर है और कार्यकर्ताओं ने वह आवश्यक जोष, गति व भागीदारी नहीं थी। लेकिन यदि कार्यकर्ताओं की भागीदारी ज्यादा थी, तब भी आत्मावलोकन आत्मचिंतन करना पड़ेगा कि बिना आम जनता की भागीदारी के 2029 के तय किये गोल पोस्ट कैसे प्राप्त कर सकते हंै। काॅकरोज जनता पार्टी का जंतर-मंतर का आंदोलन, बिना संगठन के था, लेकिन जनता खडी हो गई थी और इसलिए आंदोलन सफल होकर षिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पडा। इससे सीख लेने की आवश्यकता है। तीसरा निश्चित रूप से इस आंदोलन से उर्जा पैदा हुई लेकिन उस उर्जा को संभालकर, रखकार, समय-समय पर जनता के बीच प्रसारित और वितरित करने की जिम्मेदारी संगठन व कार्यकर्ताओं के बल पर ही नेतृत्व कर सकता है। इसलिए प्रत्येक पार्टी को अपने संगठनात्मक ढ़ाचे को मजबूत करने की आवश्यकता है यह सीख व भारतीय जनता पाटी व संघ से सीखते है जिसकी संगठन क्षमता पर समय-समय पर विपक्षीयों ने भी सराहा है। *भाजपा गलत गोल पोस्ट तय कर रही है।* वर्तमान में पिछले चार महीनों से खासकर जब से काॅकरोच जनता पार्टी आई है, भाजपा अपना गोल पोस्ट तय नहीं कर पा रही, जिसमें उसे महारत हासिल है। वे अपने तय गोल पोस्ट पर अभी तक कांग्रेस को घुमाया करते थे। लेकिन आज न तो भाजपा गोल पोस्ट तय कर पा रही है और जो तय कर रही है वह गलत होकर असफल हो रही है। जैसे 1984 के सिख समुदाय की भावनाओं को उभारने के लिए सिख समुदाय और भारतीय जनता पार्टी ने मिलकर विरोध में प्रदर्शन किया है। दुर्भाग्य से अनावश्यक रूप से इसका नेतृत्व वह सिख ‘‘बदनाम’’ व्यक्ति हरदीप सिंह पूरी कर रहे थे जो खुद पंजाब में कांग्रेस के उम्मीदवार से चुनाव हार गये थे। मतलब सिख सेंटीमेंट का मुद्दा जो कांग्रेस के खिलाफ चलाना चाहते है, उसके प्रतीक (सिख) को उस भावनात्मक मुद्दे के रहने के बावजूद जनता ने नकार दिया। आखिर उसे हासिल क्या हुआ? *संबित ‘‘पात्रा’’ हंसी का ‘‘पात्र’’ क्यों बना रहे हैं* । 1 नवम्बर की रैली को असफल दिखाने के लिए संवित पात्रा ने एक पूरी प्रेस वार्ता की कर डाली। जिसमें उन्होंने आयोजन स्थल में अधिकतम कितने व्यक्ति इकट्ठा हो सकते है। उसका बहुत ही विभाजन वैज्ञानिक गणना की। 40 प्रतिशत खाली रामलीला ग्राउंड मैदान का कुल क्षेत्रफल (10-12 एकड़) बताया जाए, मंच ‘डी’ एनक्लोजर कितना प्रतिशत जगह घेर रहा है (लगभग 15प्रतिशत ), (40प्रतिशत) हिस्सा पूरी तरह खाली था। (28,000), कुर्सियां लगाई गई (5,000-7,000), खाली थी। मतलब अधिकतम (20,000) की उपस्थिति संभव हो सकती है। आयोजन के अनुसार निर्देश आये की (35-40 हजार) हो सकते है। अतः उक्त गणना बहुत ही गलत तो नहीं है लेकिन उन्होंने जो विडियो दिखाए वह निश्चित रूप से हास्यास्पद था। सैकड़ों वीडियो सोशल मीडिया में चल रहे है उक्त वीडियो द्वारा दिखाये गये है का समर्थन नहीं करते है। मतलब वह वीडियो संभव नहीं लिया गया जिसका दावा किया गया। खाली कुर्सी का एक बडा कारण कीचड़ व पानी का होना है। *क्या चित्रा त्रिपाठी माफी मांगेगी।* रैली के एक दिन पूर्व एबीपी न्यूज रात्रि 09 बजे कार्यक्रम ‘जनहित’ में चित्रा त्रिपाठी ने निम्न थंबनेल लगाया था- ‘‘1 नवंबर की डेट…. अराजकता सेट’’। क्या चित्रा त्रिपाठी भूल गई है कि पुलिस ने इस रैली इजाजत दी है? क्या पुलिस भी अराजकता फैला रही है? इस रैली के पूर्व ही उक्त शीषर्क की कड़ी आलोचना हुई जो रैली अब शांतिपूर्ण तरीके से के सम्पन्न हो जाने पर पूरे देश से दिल्ली में भाग लेने वाले व्यक्तियों सहित कहीं भी कोई घटना नहीं हुई। सिर्फ एक पुलिस का आंदोलनकारी के बीच हुआ हल्का सा विवाद वाला वीडियो आया। अराजकता कौन फैलाने का प्रयास कर रहा था? जिसे शांतिप्रिय जनता ने नकारा। मीडिया निश्चित रूप से चित्रा त्रिपाठी को माफी मांगनी चाहिए वैसे चित्रा त्रिपाठी पूर्व में भी कई बार माफी मांगने लायक कार्य कर चुकी है। उपप्रधान समपादक राकेश डबबू तायवाडे बैतूल आमला Please follow and like us: Post Views: 61 Post navigation 75 कदम की आज की धरती सेवा _पुरानी एच एम टी फैक्ट्री से औद्योगिक क्षेत्र की सड़क के किनारे से 792 किलो पॉलीथिन प्लास्टिक डिस्पोजल संग्रहित किया गया —*——–*——-***________ 75 कदम का 29 वाँ दिन – पॉलीथिन मुक्त ,कैंसर मुक्त मिशन 0000000000000 किसान परिवारों की प्रतिभाओं को मिला सम्मान, 54 विद्यार्थियों को बांटी 15.84 लाख की प्रोत्साहन राशि