गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय ।।बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए।।रिपोर्टर संजय वर्मा आष्टा/केवलराम मालवीय 18 पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म गुरु पूर्णिमा के दिन ही हुआ इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं.गुरु पूर्णिमा के अर्थ को विस्तृत रूप दिया जाए तो “गुरु” का अर्थ अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला होता है गुरु का एक अर्थ और गुरुत्वाकर्षण भी होता है जिस प्रकार से गुरुत्वाकर्षण बल मिट्टी से मिट्टी ,पत्थर से पत्थर को जोड़कर एक ठोस धरती का निर्माण करता है उसी प्रकार से गुरु भी एक दूसरे के मन मस्तिष्क को जोड़कर ही रहते हैं. हमारे धर्म संस्कृति में गुरु का बड़ा महत्व होता है जो हमें सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा दे वह हमारा गुरु होता हैआज गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में मां कृष्णा धाम आष्टा बाईपास पर आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव में हजारों की तादाद में लोग अपनी गुरु -मां कृष्णा जी के दर्शन करके आशीर्वाद लेने पहुंचे. आयोजन पर मां कृष्णा जी ने आज के सत्संग में कहा कि गुरु अपने शिष्य को दीक्षा देते हैं तो अभी तक के सारे पाप को हर लेते हैं जिससे वह व्यक्ति निर्मल मन वाला बन जाता है गुरु से दीक्षा लेने के बाद उस व्यक्ति के सारे कार्य गुरु के द्वारा संपादित होते हैं शिष्य जो भी कार्य करता है वह सब पूर्ण रूप से सफल होते हैं वशर्त उस व्यक्ति की गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा होनी चाहिए.मां कृष्णा जी ने कहा कि जो हमारे पास है वही सब कुछ है उसे छोड़कर ज्यादा के चक्कर में पढ़ने से हमारे पास की थोड़ी बहुत है वह भी गंवानी पड़ जाती है मां कृष्णा जी ने रावण का जिक्र करते हुए कहा कि व्यक्ति के पास सब कुछ है तो सदमार्ग बताने वाला गुरु भी होना चाहिए नहीं तो हमारे और रावण के जीवन में कोई अंतर नहीं रह जाएगा. Please follow and like us: Post Views: 347 Post navigation आष्टा प्रभु प्रेमी संघ ने मानस भवन में मनाया गुरु पूर्णिमा उत्सव बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आष्टा कांग्रेस ने प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा.