बैतुल संजीवनी स्कूल और लिटिल चैंप स्कूल में लिखा गया बालहठ रक्तदान की जिद पत्र परिवार के नाम रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 गुरुवार *बालहठ रक्तदान की जिद* एक पत्र परिवार के नाम नवाचार से आयेगी जागरुकता राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भी नैतिकता,मानवीय और संविधानिक मूल्य ओर वैश्विक कल्याण की भावना है इसी भावना के तहत बालहठ रक्तदान की जिद कार्यक्रम एक पत्र परिवार के नाम प्रारंभ किया गया है बालहठ का मतलब बच्चों की ज़िद या ठिनक है, जो अक्सर उनकी मासूमियत और दृढ़ इच्छाशक्ति को दिखाता है, जिससे वे अपनी बात मनवा लेते हैं; इसका महत्व बच्चों के चरित्र निर्माण, दृढ़ संकल्प (सकारात्मक होने पर) और वात्सल्य रस के रूप में होता है बच्चे यदि ठान ले तो अपनी बात मनवा लेते है उनकी मासूमियत से परिवार उनकी बात अवश्य मानता है इसी उद्देश्य से बैतूल जिले में 500 से अधिक सिकल सेल से पीड़ित मासूम बच्चों का जीवन दूसरों के रक्त पर ही निर्भर करता है क्योंकि इन मासूमों को हर माह खून लगता है कई बार इन्हें ब्लड बैंक में ब्लड उपलब्ध न होने के कारण समाजसेवी संस्थाओं से मदद लेनी पड़ती है कई बार परिवार रक्त के लिए भटकता है इस कमी को दूर करने मां शारदा सहायता समिति द्वारा बालहठ रक्तदान की जिद पत्र परिवार के नाम कार्यक्रम शुरू किया गया है संस्था के गजेंद्र पवार भरत सूर्यवंशी,महेंद्र मालवीय,निमिष मालवीय,डॉक्टर सागर बिँझाड़े,प्रकाश बंजारे ने बताया कि द्वितीय दिवस संजीवनी स्कूल और लिटिल चैंप स्कूल के सैकड़ों बच्चों द्वारा अपने परिवार को पत्र लिखा गया है जिससे रक्तदान के लिए ओर सिक्लसेल बीमारी के लिए लोग जागरूक होंगे। संस्था के सुनील सलूजा, शैलेंद्र बिहारिया और अध्यक्ष हिमांशु सोनी,अनंत तिवारी ने बताया कि बेस्ट पत्र लेखन पर प्रत्येक स्कूलों में प्रथम,द्वितीय,तृतीय पुरस्कार दिए जाएंगे पत्र की भाषा अत्यंत मार्मिक है जिससे माता पिता परिवार रक्तदान के लिए जागरूक अवश्य होंगे और सिकल सेल के प्रति जागरूक होंगे। रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 Please follow and like us: Post Views: 107 Post navigation आष्टा मासिक ब्लॉक स्तरीय समीक्षा (BPMU) बैठक स्थान: जनपद शिक्षा केंद्र, आष्टा, जिला सीहोर दिनांक: 11/12/2025 निलय के जन्मदिवस पर भावविभोर विलय हुए जीवन जमीन और संगठन