reported by first khabar Bharat शाजापुर: शुक्रवार 8 दिसंबर 2023 से रविवार 10 दिसंबर दोपहर तक चलने वाले तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रांत सम्मेलन में नगर व मंडल एवं ऊपर के सभी कार्यकर्ता शाजापुर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में एकत्र हुए हैं।इस प्रकार का सम्मेलन 3 वर्षों में एक बार होता है प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां प्रांत के माननीय संघचालक का चुनाव होता है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रचना अनुसार मालवा प्रांत में इंदौर, देवास,उज्जैन,नीमच,रतलाम, मंदसौर,धार,झाबुआ,अलीराजपुर,बुरहानपुर,खरगोन,बड़वानी, सेंधवा के नगर व मंडल की टोली एवं ऊपर के सभी स्वयंसेवक यहां एकत्र हुए हैंस्वयंसेवकों का यहां पहुंचने का सिलसिला शुक्रवार सायं से आरम्भ हुआ। जबकि परिसर को राममय बनाया गया है आज 9 दिसंबर को प्रातः5 बजे जागरण के साथ ही दिन की शुरुआत हुई, प्रातः 9 बजे प्रथम उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह व वर्तमान में अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मालवा प्रांत को पुराने लोगों ने गहराई से सींचा है और जब पेड़ मजबूत होता है तो स्वाभाविक है उसकी जड़े भी गहरी होती है। यहां प्रस्तुत एकल गीत से प्रेरणा लेकर कहा कि “शून्य से शतक” तक बनने की प्रक्रिया है उन्होंने कहा कि ऐसा ही 1925 में संघ चला था एक वर्ष बाद शतक पूरा होने वाला है यानि 1925 में संघ शताब्दी वर्ष मनाने वाले हैं। एक समय था जब लोग बहिष्कार करते थे, थोड़ी ताकत बड़ी तो विरोध शुरू हुआ और आज स्वीकार्यता बढ़ गई है आगे चलकर सर्वमान्य बनना है। आज की स्थिति को देखा जाए तो कार्य तो बढ़ रहा है बढ़ना भी चाहिए पर अभी और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है, डॉक्टर हेडगेवार जी ने संघ की स्थापना की थी तब कल्पना भी नहीं की थी कि शताब्दी वर्ष मनाया जाएगा, आगे बढ़ेंगे तो अगली शताब्दी की और बढ़ेंगे पर अगली शताब्दी ना मनाना पड़े इसके लिए कार्य का दृढ़ीकरण और विस्तार करके सर्व मान्यता स्थापित करना पड़ेगी!श्री सोनी ने कहा कि कार्य विस्तार सब मंडलों व नगरों तक पहुंचना चाहिए इसी पर विचार करें तो हम कहां तक पहुंचे हैं हम कहेंगे कि हम पहुंच गए हैं पर संघ मानने वाला नहीं है, एक समय था जब हम हर प्रांत तक पहुंचे थे तब विचार आया कि अब छुट्टी हो गई है फिर विचार आया कि हमें हर प्रांत व विभाग तक पहुंचना है फिर विचार आया कि हर जिले तक पहुंचना है ओर विचार आया कि नगर व मंडल की सभी बस्तियां तक पहुंचना है जैसी जैसी आवश्यकता लगी हम कार्य को नीचे उतारते गए और यही प्रक्रिया समाज के सभी लोगों के मन मस्तिष्क तक यात्रा जारी रहेगी, शताब्दी वर्ष में हमें हर इकाई व नगर मंडल के गांव तक पहुंचना है हमें सर्वव्यापी यानी सब बस्तियों की गली तक पहुंचना है सर्वस्पर्शी यानि समाज के हर संगठन तक पहुंच कर उन्हें जोड़ना है, हर कार्यकर्ता का आगे आने वाले समय में दायित्व रहेगा कि हर समाज के लोगों की संघ कार्य में सहभागिता बनाएं और उनमें समझ विकसित करें ,प्रत्येक शाखा को यह तय करना होगा कि हमारे क्षेत्र में सर्वव्यापकता रहे और सर्वस्पर्शी बने, जिससे सभी वर्गों व सभी समाजों के लोग हमारे साथ संघ कार्य में सहभागी बने। श्री गुरु जी कहते थे कि हमारे यहां समस्याओं की चर्चा होती है पर जब तक सूझबूझ व कल्पनाशील एवं समाधान दायक कार्यकर्ता खड़े नहीं होंगे तब तक ज्यादा कुछ करना संभव नहीं है! एक प्रसंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कार्य का आधार कार्यकर्ता होता है कार्य के समग्र रूप से दो चरण होते हैं एक व्यक्ति निर्माण और दूसरा समाज का जागरण,संगठन और जागरण दोनों श्रेणी का अपना-अपना महत्व है उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि यह दोनों रेल की पटरी पर चलने वाले दोनों पहिए जैसे हैं प्रशिक्षण की प्रक्रिया को नीचे बस्ती तक उतरना पड़ेगा विद्यार्थी व प्रौढ शाखा को काफी हद तक कारगर व सिद्ध बनाना पड़ेगा इसलिए इन्हें पोषित करना है व्यक्ति निर्माण व समाज जागरण में सब की भूमिका निभाने वाले स्वयंसेवकों की क्षमता बड़े इसके लिए कुछ बिंदुओं पर मूल्यांकन होना चाहिए, समाज को प्रभावी ढंग से प्रबोधन देने वाला स्थाई कार्यकर्ता तैयार हो इसके लिए वैसा ही प्रशिक्षण की आवश्यकता है, यदि 30 40 वर्ष तक शाखा चली और बस्ती भी परिस्थिति वैसी की वैसी है तो कर्मकांड करने से कोई फायदा नहीं है!मानो गंगा बह रही है और चार पेड़ उसके किनारे सुखे खड़े हैं तो कोई मतलब नहीं है कर्मकांड करने की, इसके लिए मूल्यांकन करना चाहिए हमारे कार्य करने का निष्कर्ष यह है कि हमारी बस्ती में कितने परिवार समरस हुए ,कितने परिवार स्वदेशी अपना रहे हैं, कितने परिवार पर्यावरण से जुड़े हैं ऐसा विचार करेंगे तो हमें हमारे लक्ष्य की प्राप्ति होना शुरू होगी।एक विचार हमें यह भी करना है कि पुराने कार्यकर्ताओं को जोड़कर चलना है यह कार्यकर्ता पूर्ण नींद अवधूत होते हैं जिस दिन कार्य करते-करते रस समाप्त हो जाता है वह कार्यकर्ता नीरस हो जाता है यह जो सूप्त शक्ति समाज परिवर्तन के लिए जागृत हो गई तब काफी परिवर्तन होने लगेगा, इसको जागृत करने के लिए नगर मंडल तक व्यवस्था करना है समाज जीवन में ऊंच नीच का भाव समाप्त करने की आवश्यकता है, सज्जन शक्ति को जागृत करने का यह काम आसान हो जाएगा, जागरण श्रेणी और संगठन श्रेणी का अलग-अलग प्रशिक्षण करने की आवश्यकता है स्वर प्रेरणा से यदि हम कार्य करने लगे तो और योजना बनाने लगे तो सही दिशा में समाज परिवर्तन होने लगेगा। आज हमें संकल्प लेने की आवश्यकता है कि समाज परिवर्तन का एक मॉडल प्रस्तुत करेंगे,हमें हमारी शाखा क्षेत्र का सामाजिक अध्ययन भी करने की आवश्यकता है यदि सामाजिक अध्ययन हमने कर लिया तो समस्याओं का निराकरण भी आसानी से कर लेंगे। Please follow and like us: Post Views: 307 Post navigation मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में CM के चुनाव के लिए BJP ने नियुक्त किए पर्यवेक्षक आष्टा में पाटीदार समाज के लोगों ने सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि मनाई