रिपोर्टर संजय वर्मा/ केवलराम मालवीय आष्टा। मानव देह मिलना दुर्लभ है मिली है इसलिए हर परिस्थिति में खुश रहना है महापुरुषों के सत्संग में अधिक से अधिक जाना है क्योंकि बिना सत्संग के मनुष्य को विवेक नहीं होता । और जब तक भगवान की इच्छा नहीं होती व्यक्ति को सत्संग नहीं मिलता है। बिना सत्संग विवेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई। उक्त प्रेरक विचार श्री राम मंदिर धर्मशाला महत वाडा में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस व्यास गादी पर विराजित मालवा क्षेत्र के सुप्रसिद्ध भागवत कथा का संत श्री मिट्ठूपुरा पुरा सरकार द्वारा व्यक्त किए गए। कथा से पूर्व भागवत मैया की भव्य शोभायात्रा निकाली गई मुख्य यजमान गगन सिंह पटेल द्वारा सिर पर भागवत मैया को धारण कर मंदिर जी से कथा स्थल पर लाया गया । जहां उपस्थित सभी हरि भक्तों द्वारा भागवत जी का विधिवत पूजन कर महाराज श्री का स्वागत किया। आज पूज्य महाराज श्री द्वारा सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए बताया, क्षणभर का सत्संग व्यक्ति का जीवन बदल देता है। और एक पल का कुसंग व्यक्ति का जीवन बर्बाद कर देता है। इसी क्रम में महर्षि बाल्मीकि के जीवन की कथा सुनाते हुए बताया कि, नारद जी का थोड़ा सा सतसंग मिला। और उनका संपूर्ण जीवन ही बदल गया। गुरु द्वारा राम नाम का मंत्र दिया, पर राम को भूलकर उल्टा नाम मरा, मरा मंत्र का जाप किया। और ब्रह्मर्षि का पद प्राप्त कर लिया। उल्टा नाम जपत जग जाना। बाल्मीकि भए ब्रह्म समाना। जब व्यक्ति के जन्म जन्मांतर के संचित पुण्य का उदय होता है। तब उसे सत्संग की प्राप्ती होती है। इसके साथ ही आज प्रथम दिवस की कथा में महाराज सुखदेव जी के जन्म की कथा, देव ऋषि नारद के पूर्व जन्म का वर्णन किया। श्रीमद् भागवत के महत्व के साथ ही भक्ति, ज्ञान, वैराग्य की कथा का बड़े भावपूर्ण ढंग से रसपान कराया। वेदव्यास जी ने 18000 श्लोक में श्रीमद् भागवत कथा की रचना की, उसके पश्चात वेदव्यास जी ने यह कथा अपने पुत्र सुखदेव जी को सुनाई। और सुखदेव जी ने यह कथा राजा परीक्षित को सुनाई। भागवत कथा श्रवण करने से सातवें दिन मृत्यु का श्राप पाये राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्त हुआ। श्रीमद् भागवत कथा जीव को जगदीश से जोड़ने के लिए सेतु का काम करती है। इसी बीच संगीतकार जगदीश प्रजापत के गाए हुए मधुर भजनों पर श्रोताओं ने भाव विभोर होकर नृत्य किया। आज का प्रसाद जनपद सदस्य ऋषि पटेल की ओर से वितरण किया गया। इस अवसर पर सज्जन सिंह पहलवान ,भीम सिंह माटसाहब, ऋषि पटेल, गजराज सिंह, पंडित सतीश दुबे, सुरेंद्र सिंह पडियार, सज्जन सिंह साहेब, हरि सिंह भगत, अके सिंह ,सहित बड़ी संख्या में माता बहनों ने कथा का श्रवण किया। Please follow and like us: Post Views: 278 Post navigation श्री शिव महापुराण कथा 6 अगस्त से 12 अगस्त तक आईबी सिटी आष्टा में मुकद्दर शहर मक्का उम्र के लिए 52 यात्री हुए रवाना