*शिक्षक आरोग्य दूत प्रशिक्षकllशिक्षण के तृतीय चरण में जेंडर,मन हितएप के साथ गतिविधियों से जाना जीवन कौशल* *जेंडर एक सामाजिक अवधारणा आदतों में बदलाव जरूरी* *उमंग है तो जिंदगी में रंग है* किशोरों के सर्वांगीण विकास के लिए आयुष्मान भारत उमंग स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस कार्यक्रम के अंतर्गत रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 शिक्षक बने हेल्थ एंड वेलनेस एम्बेसडर (आरोग्यदूत) बदलेगी स्कूलों की तस्वीर किशोर बच्चो के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य को मजबूत आधार देने के लिए आयुष्मान भारत के राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत उमंग स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस कार्यक्रम का तृतीय चरण जैन दादावाड़ी में संपन्न हुआ हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूलों में उमंग के बेहतर परिणाम मिलने के कारण अब इसे माध्यमिक शालाओं में भी संचालित किया जाना है जिससे बच्चे इसशिक्षक निर्धारित दक्षताओं को हासिल कर दैनिक जीवन में आने वाली विभिन्न परिस्थितियों के साथ ,चुनौतियों से निपटने में सक्षम बन सके वे तनाव प्रबंधन,स्व जागरूक हो सके इसी उद्देश्य से जिले के शिक्षकों को हेल्थ एंड वेलनेस एम्बेसडर आरोग्य दूत बनाया जा रहा है जिससे जिले के सभी माध्यमिक स्कूलों की तस्वीर बदल सके मास्टर्स ट्रेनर्स शैलेंद्र बिहारिया ने बतायाा कि कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रनिर्माता शिक्षक नीलेश लहरपुरे,विशेष अतिथि के रूप में जिला रक्त केंद्र अधिकारी डॉक्टर अंकिशिक्षकता सीते, डाइट प्रभात पट्टन से श्रीमती बेग,मास्टर्स ट्रेनर्स श्री ओमप्रकाश साहू,मास्टर्स ट्रेनर्स श्रीमती अरुणा साहू,श्री ज्ञानदेव साहूकार,श्री विक्रम शर्मा,श्रीमती रश्मि राजुरकर, डाइट से श्री रितेश पठाडे,उमंग परामर्श दाता सुश्री शिल्पा वर्मा, जन मंगल संस्थान के प्रमुख श्री कपिल चौरसिया,शिक्षक भीमराव गायकवाड़,अखिलेश जी ,दुर्गेश जी मुख्य रूप से उपस्थित थे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जीवन कौशल शिक्षा,विद्यार्थियों का स्वस्थ्य व्यवहार,व्यक्तिगत स्वच्छता,एनीमिया की जांच, दंत रोगों की रोकथाम, आंखों का सही समय पर उपचार एफ ए की गोलियों के लिए प्रोत्साहित करना,तंबाकू मुक्त शाला, बच्चों को किसी भी प्रकार से नशे की आदत न लगे प्रयास,किशोरियों को महावारी के दौरान माहावारी स्वच्छता प्रबंधन तकनीक को अपनाने हेतु प्रेरित करना,स्वच्छ पेयजल,आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन अन्तर्गत प्रत्येक छात्र का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड रखने हेल्थ आई डी बनाना है कार्यक्रम में जेंडर अवधारणा विशेष आकर्षण का केंद्र रहाा जब एक पुरुष को महिला मानकर दैनिक दिनचर्या के कामों का बोझ एक एक काम के बदले उन पर डाला गया तो 15 मिनिट में ही काम के बोझ से परेशान हो गए इस अवसर पर गतिविधि के माध्यम से बताया गया कि दैनिक जीवन में भी हम बालक बालिकाओं में शिक्षकlकितना भेदभाव करते है बालकों के खिलौने बालिकाओं के खिलौने उनका रंग तक समाज तय करता है हमे बेटियों को आगे बढ़ने सोच बनानी पड़ेगी इस अवसर पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं हेतु मन हित एप,जस्ट आस्क चैट बोट किशोर हेल्प लाइन से कई समस्याओं का निराकरण प्राप्त कर जीवन को कुशल बनाया जा सकता है बताया गया। रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 Please follow and like us: Post Views: 49 Post navigation सतपुड़ा की घनी वादियों की गोद में बसे छोटा भोपाली महादेव मैं पहुंचे लाखों श्रद्धालु , शिखर पर जाने पर पाबंदी भक्तों लोगों में मायूसी शिवाजी जयंती पर माहाडिक परिवार का भव्य आयोजन, राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का दिया संदेश