भारत में सम्मान पुरस्कार दिए नहीं बांटे जाते है _प्रथम भारत
आज भी देश भक्त सूबेदार सोमेश्वर दत्त सिंह का परिवार भारत रत्न, पद्म पुरस्कार से वंचित?

रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏

Screenshot 2026 01 28 15 51 38 605 Com.whatsapp 300x211
जिस परिवार का नाम खेलो की दुनिया में सबसे आदर और सम्मान से पुकारा जाता हैं , वह परिवार का नाम है सूबेदार सोमेश्वर दत्त सिंह का जिनके परिवार के सदस्यों हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद, कैप्टन रूप सिंह , अशोक कुमार , नेहा सिंह ने भारत के लिए ओलंपिक , विश्व कप, एशियन गेम्स में तीनों रंगों के तेरह पदकों को जीतकर भारत मां को आभूषित किया, भारत का मान सारी दुनिया में बढ़ाया, भारत सरकार की दृष्टि आज तक इन्हें उनके हक के सम्मान से सम्मानित करने पर नहीं गई।
भारत रत्न के सच्चे और सर्वप्रथम इस देश में कोई खिलाड़ी यदि हकदार हैं तो वे हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद, जिन्हें दुनिया ने उनकी लगन, मेहनत और चमकते खेल कौशल को देखते ध्यान सिंह से ध्यानचंद की उपाधि से संबोधित कर दिया , लेकिन वाह री मेरी सरकारें उनके हिस्से का हक और सम्मान भारत रत्न देने में आज तक हाथ कांप रहे हैं, भारत रत्न देने के लिए हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का नाम आते ही हमारे देश के प्रधानमंत्री के दस लाख के पेन की स्याही सूख जाती हैं , जिससे वे मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की फाइल पर हस्ताक्षर कर सकते। गनीमत है कि 1956 मे हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को पद्म भूषण से सम्मानित कर दिया गया, अन्यथा सम्मान न पाने वालों की सूची में वे आज भी रहते, जैसे भारत रत्न के सम्मान देने में उनके साथ व्यवहार किया जा रहा हैं।

Screenshot 2026 01 25 09 13 24 810 Com.miui .gallery 300x222
कैप्टन रूप सिंह जिन्होंने अपने भाई हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के साथ मिलकर दुनिया की दो दो बड़ी ताकतों को ओलंपिक खेलो में धूल चटाकर भारत के लिए दो दो ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलवाने का गौरव दिलवाया , उनके हिस्से का पद्म सम्मान नहीं देने की जैसे सरकारों ने कसम खा ली हो। जिस रूप सिंह को दुनिया ने सम्मान दिया , उन्हीं के देश में उन्हें ठुकराया जाता रहा गया, जिस जर्मनी को ध्यान चंद रूप सिंह ने जर्मनी में उसकी धरती पर धूल चटा दी , उसी जर्मनी ने 1972 म्यूनिख ओलंपिक में रूप सिंह के नाम पर सड़क का नाम रखकर सम्मानित किया , वही 2012 लंदन ओलपिक में भारत के चार महान हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद, उद्यम सिंह, क्लॉडियस के साथ यूट्यूब स्टेशनों के नाम पर रुप सिंह का नाम रखकर भारतीयों को गौरांवित किया लेकिन स्वतंत्र भारत की सरकारों को रूप सिंह के खेल की चमक का रूप आज तक दिखाई नहीं दिया।

Screenshot 2025 10 23 08 56 38 006 Com.android.chrome 253x300
हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं देंगे, कैप्टन रूप सिंह और अशोक कुमार को पद्म सम्मान नहीं देंगे। जिनको दिया गया आलोचना नहीं , केवल विश्लेषण आंकलन है, और वह अपना अपना आंकलन हो सकता है । सम्मान देने में योग्यता, विद्वता , ईमानदारी, नैतिकता, सच्चाई का आखिर क्या आंकलन किया जा रहा ?
विडंबना देखिए जो विश्व कप में बारहवें स्थान पर आए और उस विश्व कप में कुल बारह टीमों ने ही हिस्सा लिया उससे नीचे जाने की कोई उम्मीद नहीं थी ,पद्म पुरस्कार के हकदार बना दिए गए, लेकिन वह खिलाड़ी जिसकी स्टिक से निकले गोल की वजह से भारत ने विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया , वह खिलाड़ी इस देश में आज तक विश्व विजेता बनने के 50 स्वर्णिम वर्ष बीत जाने के बाद भी पद्म पुरस्कार पाने का हकदार नहीं बन सका। यह वर्ष तो अशोक कुमार के विश्व विजयी गोल करने का स्वर्ण जयंती वर्ष था और कितना श्रेष्ठ होता की विश्व विजेता बनने के स्वर्णिम वर्ष में देश के प्रति दी गई उनकी सेवाओं के लिए वे सम्मानित किए जाते।लेकिन लगता हैं आज पद्म पुरस्कार योग्यता देखकर नहीं दिए जाते बल्कि विचारधारा के आधार पर बांटे जा रहे है, और पूर्व की सरकारें यह सम्मान तुष्टिकरण के आधार पर बांटते चली आई और ये विचारधारा की आड़ में बांटे दे रहे है। अब हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद, कैप्टन रूप सिंह, अशोक कुमार न तो किसी राजनैतिक विचारधारा के पोषक रहे और न ही उनसे किसी वोट बैंक को प्रभावित किया जा सकता है इसलिए वे अन्याय के शिकार होते चले गए।

Screenshot 2025 09 23 11 22 25 446 Com.whatsapp 295x300
अशोक कुमार केवल हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के सुपुत्र नहीं बल्कि भारत के उन महान खिलाड़ियों में शुमार रहे है जिन्होंने 70 के दशक में हाकी की दुनिया में अपने खेल कौशल कला से भारत का डंका चारों ओर बजाया, जिनके आक्रमण से सारी दुनिया के हाकी मुल्क घबराते और खौफजदा रहते थे। पाकिस्तान के और दुनिया के बेहतरीन सेंटर हॉफ अख्तर रसूल ने एक मुलाकात में मुझसे स्वयं कहा था कि हम अशोक कुमार के खेल से खौफ खाते थे, और जिससे हम खौफ खाते थे उसकी स्टिक से हमारे खिलाफ 1975 विश्व कप में भारत का विजय गोल निकला, जिसकी आशंका थी वही हुआ।लेकिन वाह री मेरी स्वतंत्र भारत की सरकारें तुम्हारी नजरे इस बेहतरीन खिलाड़ी पर आज तक नहीं गई !
1970 बैंकाक एशियन गेम्स में रजत पदक,1971 प्रथम विश्व कप में कांस्य पदक,1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक,1973 विश्व कप में रजत पदक, 1974 तेहरान एशियन गेम्स में रजत पदक ,1975 विश्व कप में स्वर्ण पदक ,1978 बैंकाक एशियन गेम्स में रजत पदक जीतकर भारत के लिए बहुमूल्य सेवाएं प्रदान की, किन्तु उनकी इस देश सेवा को सरकारों ने ऐसा भूला दिया जैसे मानो उन्होंने देश के लिए कुछ किया ही नहीं , लगता है देश की सेवा करना ही उनका अपराध हो गया।आश्चर्य और दुःख तो तब होता हैं कि जब बिना पदक विजेताओं तक को पद्म पुरस्कार से हमारी अंधी बहरी सरकारों द्वारा सम्मानित कर दिया गया,आखिर ध्यानचंद ,रूप सिंह, परिवार का क्या अपराध रहा।केवल यह कि वे निश्चल , निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करते रहे? क्या केवल उनका यह अपराध रहा कि वे किसी राजनैतिक दल की विचारधारा से नहीं जुड़े? क्या उनका केवल यह अपराध रहा कि वे अपने जीवन में सत्ता के गलियारों के चहेते नहीं रहे? क्या केवल उनका यह अपराध रहा कि वे देश के तिरंगे के लिए अपना सर्वस्व लुटाते रहे? लगता है सरकारें पद्म सम्मान देती नहीं है, बांटती है! हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं देंगे, कैप्टन रूप सिंह अशोक कुमार, जैसे महान खिलाड़ियों को पद्म सम्मान नहीं देंगे। ये कौन सी सरकारें हैं जो विचारधाराओं के आधार पर योग्यता का आंकलन करती हैं, और पद्म सम्मान बांटती है। जरा
शर्म नहीं आई इस देश में गुटखा का , पान मसाला का , शराब की आड़ में सोडा का विज्ञापन करने वालो तक को पद्म सम्मान से सरकारों ने सम्मानित करते चली आ रही हैं। आओ जब चार यार बैठ का डायलॉग मारते हुए रॉयल स्टैग का शराब की आड़ में सोडा का विज्ञापन देने वालों तक को पद्म सम्मान से सम्मानित कर सरकार अपने को गौरांवित समझ रही है, लोकतंत्र के मंदिर में सरकार बचाने के लिए संसद में जो रिश्वत ले ले वह इस देश में पद्म सम्मान का हकदार हो जाता हैं , लेकिन देश के खातिर हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद हिटलर जैसे तानाशाह के उच्च पद, उच्च वेतन के प्रलोभन को केवल देश के खातिर ठुकरा देते है , वह इस देश का भारत रत्न का हकदार नहीं होते हैं , क्योंकि हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद से कोई सरकार बनना, बिगड़ना नहीं है, चुनावो में कोई वोट हासिल नहीं होना है, लेकिन जिसके पिताजी को पद्म सम्मान दिया गया उसके पुत्र के साथ भविष्य में सत्ता के लिए राजनीतिक गठबंधन करना है।
आज सम्मान पाने के लिए यह मायने नहीं रखता कि आपने देश सेवा की है या नहीं बल्कि यह मायने रखता हैं ,आपने किस विचार धारा के संगठन की और उसके चलाने वालों की कितनी सेवा की हैं, मायने यह नहीं रखता कि आपने कार्य किया है या नहीं , आपने उसका प्रचार प्रसार किस तरीके से किया है, मायने यह रखता है कि जिस व्यक्ति को सम्मान दे रहे है उससे राजनैतिक कितने फायदे भविष्य में होंगे। आज लिखकर रख लीजिए कि इस वर्ष भारत रत्न पश्चिम बंगाल से दिया जायेगा एक नहीं दो नहीं तीन चार व्यक्तियों को एक साथ घोषित कर दिया जाएगा।
भले ही आज सरकारी सम्मान से ऐसे महान खिलाड़ी, व्यक्तियों को कोसो दूर रखा गया है, लेकिन भारत के जनमानस के दिलों में वे गहराई से बसते है।
हेमंत चंद्र दुबे बबलू
*नोट _इस विषय पर निरंतर और लगातार विचारों की श्रृंखला लिखी जाती रहेगी।*

रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏

IMG 20210323 185553 247x300

Please follow and like us:
Icon Follow En US
Pin Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

RSS
Follow by Email