बैतुल जननायक जी डी खंडेलवाल *बाबा*के कदमों में श्रद्धा सुमन अर्पित है रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 betul कल 25 दिसम्बर 1978 कि वह सुबह दुनिया के समस्त गिरजाघरों में ईसा के जन्म की घंटियां गूंज रही थी, साथ भारत के पूर्व प्रधान मंत्री भारत रत्न अटल बिहारी जी का जन्म दिन भी जनसंघ पार्टी मना रही होगी , लेकिन दुनिया में एक ऐसा गिरजाघर भी था, जहां न तो की घंटियां गूंज रही थी और, न प्रार्थना सभा हो रही थी। हा अवश्य शोक सभा का आयोजन हो रहा था ,क्योंकि बैतूल के जननायक जी डी खंडेलवाल का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन होने के लिए अपनी प्यारी जनता के कंधों पर अंतिम यात्रा के लिए निकला था, तब बैतूल के मसीही समाज ने इंसानियत सद्भावना मानवता का संदेश देते हुए निर्णय लिया कि आज गिरजाघर स्व जी डी खंडेलवाल को याद करते हुए नहीं खोला जायेगा, यह सम्मान दिया था जनसंघ के जननायक नेता का जो बैतूल मसीही समाज द्वारा पूरी दुनिया को दिया गया, आज हमारे शहर का ,जिले का ,घर का दीपक बुझ गया है तो हम कैसे अपने प्रभु के जन्म दिन पर खुशियां मना सकते हैं? यह थी मसीही समाज की संवेदनशीलता । प्रार्थना कल हो जाएगी , चर्च कल खुल जायेगा, उस जननायक की मौत , हर एक आंखों में आंसू थे, हर एक व्यक्ति अपने जननायक को आखिर बार प्रणाम करने के लिए बेताब था, अंतिम यात्रा का ओर_छोर ही नहीं था, जन सैलाब मानो समुद्र की लहरों की तरह उमड़ उमड़ कर आ रहा था, चारों ओर मानो एक ऐसी खामोशी जो सभी को बस रुला रही थी। आखिर उस जननायक में ऐसा क्या रहा होगा? हम आंकलन और कल्पना ही कर सकते है क्योंकि हमारी पीढ़ी ने उनके बारे में सुना है देखा नहीं है ।न तो बड़ी बड़ी घोषणाएं थी ,न बड़े बड़े वादे , बस वह केवल अपनी जनता के हित के लिए लड़ना जानता था, संघर्ष, आंदोलन की रपटीली राहों पर उसे चलना और चलाना आता था, आदिवासी समाज की आवाज बनकर व्यवस्था प्रशासन पर गरजना आता था,आदिवासी समाज प्यार से जी डी बाबा कहकर पुकारता था , वह जनसंघ के कच्छ आंदोलन का नायक भी था, वह मंत्री भी बना पर आंदोलन के लिए मंत्री पद को भी ठुकरा आंदोलन में कूद गया, आंदोलन करना तो उनका कर्म रहा। पद पर आसीन हुए तो जनता की मूलभूत मौलिक आवश्यकताओं कि पूर्ति करना,केवल मेरी जनता को पानी मिल जाएं ताकि कोई कंठ प्यासा न रहे, बिजली की रोशनी हो जाएं ताकि मेरे शहर का बच्चा बिजली की रोशनी में पढ़ सके, स्टेडियम बन जाए ताकि मेरे शहर के खिलाड़ी बच्चे जाकर खेल सके । सब के लिए सोचना जैसे उनका धर्म था, आमजन के लिए घर का दरवाजा कभी बंद नहीं किया,इसलिए तो वह जननायक था, जनसंघ का दीपक था। जी डी साहब के कदमों में 75 कदम 99 दिन की ओर से श्रद्धा सुमन अर्पित है। रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 Please follow and like us: Post Views: 472 Post navigation Amla शक्ति संवर्धन गायत्री यज्ञ के लास्ट दिन बिदाई के भावुक भजन ‘ हम विदाई ले रहे हैं आप सब से हमें अब दूर जाना है, यह अवसर फिर से आने वाला है, हमें दूर जाना है , सभी की आखे नम कर दिया,अयोजको ने सभी का सधुवाद कहाँ आमला श्री शिव महापुराण कथा 24 दिसंबर से प्रारंभ 1 जनवरी 26 दिन गुरुवार को समापन