Betul मानवता अभी जिंदा है यह साबित कर दिया डॉक्टर रूपेश पद्माकर ने, आपने जेब से खरीदे सर्जिकल उपकरण और दिव्यांग बेटी का किया सफल ऑपरेशन — बेटी के परिजनों हुए खुश रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 बैतूल डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है। कई डॉक्टर समय-समय पर इस कहावत को चरितार्थ भी करते हैं। मध्यप्रदेश के बैतूल में भी एक डॉक्टर ने मानवता का ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसकी सर्वत्र सराहना हो रही है। गौरतलब है कि बैतूल के जिला अस्पताल में कुछ ऐसे भी डॉक्टर हैं जो पीड़ित मानवता की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उनके द्वारा गरीबों से रुपए लेना तो दूर, जरूरत पड़ने पर वे अपनी जेब से रुपए लगाने में भी पीछे नहीं हटते हैं। ऐसे ही एक डॉक्टर हैं हड्डी रोड विशेषज्ञ डॉ. रूपेश पद्माकर। दरअसल एक दिव्यांग मजदूर की बेटी के जांघ की हड्डी टूटने पर और जिला अस्पताल में आपरेशन करने जरूरी सर्जिकल उपकरण नहीं होने पर भोपाल रेफर कर दिया था। दिव्यांग मजदूर और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति भोपाल जाने की नहीं थी। ऐसे में डॉ. पद्माकर ने अपनी जेब से ढाई हजार रुपए के सर्जिकल उपकरण खरीदे और तीन डॉक्टरों ने मिलकर जिला अस्पताल में ही मासूम बालिका आपरेशन किया। 👉बाईक की टक्कर से हुआ था पैर फ्रैक्चर कान्हेगांव निवासी 8 वर्षीय मासूम जानवी इवने पिता कमलेश इवने विगत रविवार शाम को गांव में ही सामान लेने किराना दुकान गई थी। इस दौरान उसे एसक अज्ञात बाईक चालक ने टक्कर मार दी और फरार हो गया। जानवी के दाएं पैर की जांघ की दोनों हडृडी टूट गई थी। परिजन उसे पहले शाहपुर अस्पताल ले गए वहां से जिला अस्पताल लाया गया। 👉मासूम को किया था भोपाल रेफर जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रूपेश पद्माकर ने बताया कि जानवी के दाएं पैर में चोट लगी थी। एक्सरे में उसके जांघ की दोनों हड्डी टूटी निकली। जिला अस्पताल में आर्थाेपेडिक सर्जरी आयटम उपलब्ध डॉ.पद्माकर ने बताया कि जानवी के पैर में दो रॉड लगनी थी। इसके साथ ही अन्य सर्जिकल उपकरण खरीदने परिवार के पास रुपए नहीं थे। तब मैंने स्वयं 25 सौ रुपए देकर सर्जिकल उपकरण बुलवाए। 👉डॉ. रानू वर्मा ने दिया एनेस्थिसिया आरएमओ डॉ. रानू वर्मा को मरीज की स्थिति बताई तो वे एनेस्थिसिया देने तैयार हो गए। जिला अस्पताल के आपरेशन थियेटर में डॉ. रूपेश पद्माकर के साथ ही डॉ. रानू वर्मा साथ मिलकर आपरेशन किया। आपरेशन के दौरान उसे दो रॉड लगाई गई है जो कुछ दिन बाद निकल जाएगी। 👉तो हमेशा के लिए हो जाती दिव्यांग डॉ. पद्माकर ने बताया कि परिवार उसे भोपाल नहीं ले जा रहा था। यदि समय पर आपरेशन नहीं होता तो दोनों टूटी हड्डी अपने आप ही जुड़ जाती और मासूम जीवन भर के लिए दिव्यांग हो जाती। उसे दिव्यांगता से बचाने मैंने आपरेशन करने का निर्णय लिया। कुछ दिन बाद वह पहले जैसे हो जाएगी। मासूम के परिजन डॉ. पद्माकर को मसीहा मान रहे हैं। ( फर्स्ट खबर भारत न्यूज़ चैनल के पत्रकार ने डॉक्टर रुपेश पद्माकर से बात की तो डॉक्टर साहब ने कहा कि गुड़ियाा का ऑपरेशन सवा घंटे किया गया और उनके परिजन बहुुुत गरीब थे इसलिए हम लोगों ने अपने तरफ से सामान खरीद कर उसका सफल ऑपरेशन किया और गुड़िया अभी स्वास्थ्य है उसके मम्मी पापा बहुत खुश है गरीब लोगों की सेवा करने से हमेंंं दुआ तो मिलतीी है हम लोग हमेशा गरीब की मदद करते हैं आज वह छोटी सी गुड़िया विकलांग होने से बच गई ) रििपोर्ट राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 Please follow and like us: Post Views: 73 Post navigation आमला शासकीय भूमि पर कब्जाधारियों की अधूरी हुई जांच 19 नवंबर 25 बैतूल पुलिस 108 एम्बुलेंस से हो रही थी गौवंश तस्करी, फोन करने पर मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल रही और यहां पर एंबुलेंस में गो तस्करी का काम चल रहा