सांसद खेल महोत्सव खेल मैदानों पर नेताओं जन प्रतिनिधियो , अधिकारियों , सत्ता के कार्यकर्ताओं अधिकरियों के कदम आगे , खिलाड़ियों के कदम–हेमंतचंद्र बबलू दुबे रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 खेल मैदानों पर नेताओं , जन प्रतिनिधियो, अधिकारियों के कदमों आगे निकलते देखता हूं तो खुशी भी होती हैं , और यह दृश्य देख मन दुखित और विचलित भी होता हैं । खुशी इस बात को लेकर होती हैं कि ये सभी जन प्रतिनिधि कभी खिलाड़ी ही रहे है और खेल मैदानों का हिस्सा रहे है और खेलो के लिए कुछ करने की ईमानदारी नैतिकता से इच्छा भी रख रहे है और खेलो के विकास के लिए आधारभूत संरचना ओ के निर्माण के लिए प्रयास भी किए गए है और भविष्य की योजनाओं को साकार रूप देने के लिए सोच भी रहे हैं, लेकिन जिस खिलाड़ी भावना को मैदान पर सीखकर ही आज हमारे जन प्रतिनिधियो ने सबने अपना यह मुकाम पाया आज पदों की चाल और कदमों ने उसी खिलाड़ी भावना को भूला बैठाया । दुःख इस बात का की इस मुकाम को हासिल करने में मैदान पर आपके साथ नंगे पैर खेले वे साथी खिलाड़ियों के कदम आपसे आगे एक कदम क्यों नहीं दिखाई पड़ते है?आप खेल मैदानों पर आगे दिखते है और यदि इन कदमों से एक कदम आगे मेरे शहर के वे वरिष्ठ खिलाड़ी होते जिन्होंने आपको खेल मैदानों पर दौड़ना सिखाया , गिर कर फिर उठना सिखाया श्री रामप्रसाद सोनी सर के कदम आगे दिखते है । आदरणीय डॉ सतीश खंडेलवाल, अभय गर्ग,रुद्र नारायण शुक्ला, श्री निवास dawnde , महिंद्र सिंह तोमर, इंद्रसेन सिंह ठाकुर,रमेश भाटिया , अक्षय वर्मा , राकेश बाजपई , अनिल वर्मा, अल्ताफ भाई, जगेंद्र सिंह तोमर, बब्बन शर्मा, नरेश शर्मा, प्रशांत गर्ग, विभाष वर्धन पांडे और न जाने कितने अनगिनत खिलाड़ी दिखाई पड़ते जिनके साथ आप खेले थे , दौड़े थे , गिरे थे , गिरकर उठे थे , एक दूसरे के जूठे गिलास से पानी पीते थे,जिनके कदमों में उम्र ने तो अवश्य बेड़ियां डाल दी है पर हौसलों को आज भी उम्र खेल मैदानों पर जाने से रोक नहीं पाई लेकिन आज आपके आचरण और व्यवहार ने बैतूल के इन महान खिलाड़ियों को आपसे एक कदम आगे होने के सुंदर दृश्य को हम सभी को वंचित कर उनके कदमों को बेड़ियों से जकड़ घर की चार दिवारी में कैद कर दिया। यदि सरकारों के आश्रित कार्यक्रमो को आयोजित किया जाते रहेगा , जब तक सत्ता की प्रशंसा आपके कानों में गूंजती रहेगी तब तक मैदान के महान खिलाड़ियों के कदमों की पद चाप सुनाई नहीं दे पाएगी ।उन कार्यक्रमो में यही दृश्य देखने को मिलते रहेंगे जहां सत्ता से जुड़े व्यक्ति और अधिकारी ही प्रथम पंक्ति में दिखाई पड़ेंगे, और मेरे शहर के महान खिलाड़ियों के कदम खेल मैदानों से नदारद दिखाई पड़ेंगे ।जिन्होंने इस बैतूल की मातृ भूमि का नाम रोशन करने के लिए वास्तव में नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमि के मंत्र को आत्म सात किया और अपने जीवन को खेलो के लिए समर्पित कर दिया। लगता है पदों को पाकर हम डंड हाथ में लेकर , गणवेश पहन नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमि लेकर चलने तो लगे लेकिन खेल मैदानों को अपनी मेहनत लगन से सीचने वाले नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमि के स्वयं सेवक खिलाड़ियों को भूला बैठे जो खेल मैदानों पर आपसे एक कदम आगे चलने के हकदार थे। हेमंत चंद्र दुबे बबलू 75 कदम 99 दिन। रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 Please follow and like us: Post Views: 195 Post navigation आमला काग्रेंस प्रभारी श्री नारायण सरले जी ने नादपुर के यूवा लोगों को दिलाई काग्रेस की सदस्यता–युवा लोगों ने कहा काग्रेस की रीति नीति और सोच से प्रभावित होकर कांग्रेस सदस्य ली बैतूल 21 अक्टूबर 2025 पुलिस अधीक्षक शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि