रिपोर्टर केवलाराम मालवीय/संजय वर्मा आष्टा भागवताचार्य अग्निहोत्री बंधु श्री नर्मदा आनंद अग्निहोत्री जी ने बताया कि सप्तम दिवस की कथा में महाभारत का प्रसंग आता है भगवान श्री कृष्ण भीमसेन के द्वारा जरासंध का वध करवाते हैं उसके बाद धर्मराज राजसूय यज्ञ करते हैं इस यज्ञ में किसी विशेष व्यक्ति की पूजा की जाती है पितामह भीष्म ने भगवान श्री कृष्ण का प्रस्ताव रखा लेकिन शिशुपाल को यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ शिशुपाल भगवान श्री कृष्ण को गाली देने लग जो भगवान को गाली देता हो जो धर्म का विरोध करता हो वही व्यक्ति शिशुपाल होता है हो सकता है उस जमाने में एक शिशुपाल होगा आज कलयुग में हजारों से शिशुपाल पैदा हो चुके हैं जो भगवान का विरोध करते हैं धर्म का विरोध करते हैं संत महात्माओं का अपमान करते हैं रामायण पन्ने फट जाते हैं रामायण को जलाई जाती है धिक्कार है ऐसे लोगों कोभगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल के 99 गलती माफ की जहां उसने 100 गालियां पूरी की भगवान श्री कृष्ण ने अपना चक्र छोड़ा और शिशुपाल का वध कर दिया भगवान लोगों को सुधारने का 99 बार मौका देते हैंइसके बाद दुर्योधन ने जुए में पांडवों का राजपाट छीन लियाहर समस्या का समाधान यह है कि हमारा सलाहकार कैसा है भागवत में दो पात्र हैं दुर्योधन एक अर्जुन दुर्योधन का सलाहकार शकुनी है अर्जुन के सलाहकार भगवान श्रीकृष्ण हैं ध्यान रहे कोई हमें सलाह देने वाला शकुनी ना मिल जाए नहीं तो हमारे परिवार का नाश हो जाएगा वह हमारे परिवार को बर्बाद कर देगा ऐसे लोगों से सावधान देना चाहिएजब महाभारत का युद्ध निश्चित हुआ भगवान श्री कृष्ण के पास सहायता मांगने के लिए अर्जुन एवं दुर्योधन दोनों पहुंचेभगवान श्री कृष्ण ने कहा मैं प्रतिज्ञा कर चुका हूं इस महाभारत युद्ध में हथियार ग्रह नहीं करूंगा एक तरफ मैं अकेला रहूंगा एक तरफ मेरी नारायणी सेना रहेगी अब आपको जो मांगना है मांग लो दुर्योधन ने भगवान की सेना मांगी अर्जुन ने कहा प्रभु आप तो मेरे रथ के सारथी बन जाइए भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के सारथी बने और उस महाभारत के युद्ध में अर्जुन को विजय दिलाई जिसके साथ धर्म होगा उसके साथ भगवान होंगे जिसके साथ भगवान हैं उसकी विजय निश्चित हैइसके बाद सुदामा चरित्र आता है सुदामा जी की गरीब ब्राह्मण थे और भगवान के क्लास फेलो थे साथ साथ अध्ययन किया था भगवान के मित्र थे मित्रता भी करो तो भगवान से करो संसार के लोग अपने मित्र को धोखा दे सकते हैं लेकिन भगवान कभी भी अपने मित्रों को धोखा नहीं दे सकते भगवान श्री कृष्ण ने एक गरीब ब्राह्मण को अपनाया उनके चरणों को धोया और हमको ऐश्वर्य प्रदान कियाभागवत के अंत में भगवान श्री कृष्ण का परमधाम गमन आता है जब भगवान श्री कृष्ण परमधाम जाने लगे उद्धव जी नारद जी उनसे मिलने के लिए आए उद्धव जी ने पूछा प्रभु कलयुग में आपका निवास कहां है भगवान श्री कृष्ण ने कहा इस आने वाले कलयुग में मेरा निवास श्रीमद्भागवत पुराण में रहेगा जो भी भक्त लोग श्रद्धा से भक्ति से भाव से श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करेंगे भागवत का पूजन करेंगे उनको अरशद धर्म काम मोक्ष प्राप्ति होगी अपने पितरों का उद्धार करके अंत समय में बैकुंठ धाम की प्राप्ति होगीसुखदेव जी कहते हैं कि राजा परीक्षित का मोक्ष मैंने अपनी आंखों से देखा है भागवत मोक्ष का द्वार हैभागवत का अंतिम सूत्र है यदि सत्संग नहीं कर सकते हो तो मत करना लेकिन दुष्टों का संधि मत कर लेनायदि किसी का भला नहीं कर सकते हो तो मत करना किसी का बुरा भी मत कर देना यदि धर्म नहीं कर सकते हो तो मत करना लेकिन अधर्म भी मत कर देना पुष्प नहीं बन सकते हो तो कांटे बनकर मत ले जानाश्रीमद्भागवत के समापन समारोह में समस्त ग्रामवासी माता बहने और आसपास के गांव के लोग उपस्थित रहे और भागवत का समापन हुआhttps://youtu.be/5QGk_tKqM7I Please follow and like us: Post Views: 276 Post navigation नरसिंह वाटिका में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के रुद्राभिषेक का महोत्सव आयोजित किया गया रेलवे पेशनंर वेल्फेयर एसोसिएशन आमला शाखा के सदस्यों ने विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा