ûज्योति कलश यात्रा का उद्देश्य 1. अनन्त ज्योति के अखंड प्रकाश को तीव्र करने की भावना के साथ रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला  पूज्य गुरुदेव के प्रज्वलित विचारों की अखंड ज्योति – जो उनकी तपस्या, साधना और आंतरिक शक्ति से प्रज्वलित हुई है – उसे और अधिक प्रखर, प्रभावशाली और प्रेरक बनाने के लिए यह ज्योति कलश यात्रा प्रारंभ की गई है । यह यात्रा सिर्फ़ एक प्रतीक नहीं है—यह उन संवेदनशील साधकों का संकल्प है जो अपने जीवन को एक चलती-फिरती अखंड ज्योति बनाना चाहते हैं। यह आह्वान है कि हम सब मिलकर इस ज्योति को और व्यापक व प्रखर बनाएँ—ताकि अंधकार को दूर करने की यह शक्ति हर व्यक्ति तक पहुँच सके। 2. ऋषि दम्पति के तप, त्याग और सहनशीलता के साक्षी हर व्यक्ति, हर घर, केन्द्र और संस्था तक अखण्ड ज्योति का प्रकाश पहुँचाने की भावना के साथ – पूज्य गुरुदेव एवं पूज्य माताजी – इस ऋषि दम्पति के तप, त्याग एवं सहनशीलता से उत्पन्न यह ज्योति – अखण्ड ज्योति – कोई साधारण ज्योति नहीं है, यह युग निर्माण की दिव्य ज्योति है। इसी तेज को लेकर, यह यात्रा चल पड़ी है ताकि यह दिव्य प्रकाश हर घर, हर मन, हर केंद्र, हर संस्थान – हर जगह पहुँचे। यह हर हृदय में उस तपस्वी भाव को जगाने, हर परिवार में आदर्शों का निर्माण करने और हर संस्थान को इस युग-निर्माण यज्ञ की सक्रिय इकाई बनाने का एक प्रयास है। 3. उन घरों तक, उन मनों तक पहुँचने की भावना के साथ जहाँ पूज्य गुरुदेव के विचार अभी तक नहीं पहुँचे हैं – आज भी अनेक घर, अनेक मन ऐसे हैं जो पूज्य गुरुदेव के विचारों, उनके साहित्य, उनके संकल्पों और युग कर्तव्य की पुकार से अछूते हैं । यह ज्योति कलश यात्रा एक ऐसा माध्यम है जिसके माध्यम से संस्कार, साधना और सेवा का प्रकाश उन तक पहुँचता है । यह यात्रा मानवता को जगाने, हृदयों को संवेदनशील बनाने और जीवन को संयम पथ की ओर मोड़ने की एक सशक्त पहल है । यह उन हृदयों के लिए एक विनम्र आह्वान है जो अभी भी आलस्य, अविश्वास या अज्ञान के आवरणों से घिरे हुए हैं। 4. 1926 में अखंड ज्योति एवं पूज्य माताजी के दिव्य अवतरण के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 2026 के शताब्दी वर्ष की तैयारी – वर्ष 1926 — मात्र एक वर्ष नहीं, यह दिव्य अवतरण का वर्ष है । इस वर्ष इस धरा पर दो दिव्य विभूतियों का अवतरण हुआ — युग ऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा अखण्ड ज्योति का प्राकट्य और पूज्य माता भगवती देवी शर्मा जी का अवतरण — दोनों ही एक भव्य योजना का शुभारम्भ हैं। वर्ष 2026 में इन दिव्य विभूतियों के आगमन का शताब्दी वर्ष पूर्ण हो रहा है। यह केवल एक तिथि नहीं, एक आह्वान है , एक अवसर है , उनके उद्देश्यों का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का, उनकी युग-निर्माण योजना को क्रियान्वित करने का, तथा शताब्दी वर्ष को एक वैचारिक महोत्सव के रूप में मनाने का । ज्योति कलश यात्रा इस शताब्दी वर्ष की आध्यात्मिक तैयारी है – ताकि प्रत्येक साधक इस अवसर को जीवन के पुनर्निर्माण का अवसर बना सके। रिपोर्टर राकेश डबबु तायवाडे बैतुल आमला 🙏 Please follow and like us: Post Views: 103 Post navigation * बैतुल ओझा ढाना झोपड़पट्टी में शिक्षा व आत्मनिर्भरता का नया अध्याय NHRACACB की ऐतिहासिक पहल—लोगो ने कहा सरहनीय काम आमला चार बत्ती चौक से रेलवे क्रासिंग तक रोड के किनारे अतिक्रम हटाया, छोटे व्यापारी की परेशानी